यू चुप रहना ठीक नहीं कोई मीठी बात करो,
मोर,चकोर,पपीहा,कोयल सबको मात करो..
सावन तो मन-बगिया से बिन बरसे बीत गया ,
रस मैं डूबे नगमे की अब तुम बरसात करो …
हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं
बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें
कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमेंहाल-ए-दिल हमें भी कहना था, वो गये तब आया होश हमें
दिन गुज़रा उसकी यादों में, जो हुई शब आया होश हमेंलगा संवर गया है घर, लुटा पाया जब आया होश हमें
सुना था मोहब्बत है बला, सुनके कब आया होश हमेंअब भी तो वो ही दिखता है, अजब ये आया होश हमें
लाख चाहा भूल जायें उसे, कहाँ कब आया होश हमें